हरिद्वार/उत्तराखण्ड
Gen Z के प्रदर्शन पर संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति बोले– विरोध हो, लेकिन संस्कार और संयम के साथ; बोले- जड़ों से जुड़ना जरूरी
एंकर – संस्कृत सप्ताह महोत्सव के दौरान उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रमाकांत पांडे ने Gen Z के प्रदर्शनों और युवा पीढ़ी की बदलती सोच पर अपनी बात रखी। दिल्ली में हालिया Gen Z प्रदर्शन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार सभी को है, लेकिन भारतीय संस्कारों के अनुरूप भाषा और व्यवहार में संयम बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि संस्कृत और भारतीय ज्ञान परंपरा युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।कुलपति ने कहा कि संस्कृत में विरोध और अपनी बात रखने की परंपरा कोई नई नहीं है। स्वतंत्रता संग्राम के दौर में भी संस्कृत की महत्वपूर्ण भूमिका रही है और आज भी समाज में इसकी प्रासंगिकता बनी हुई है। उनके मुताबिक युवाओं को आधुनिक सोच के साथ अपनी संस्कृति और मूल्यों की जानकारी भी होनी चाहिए।
Gen Z को लेकर उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कारों और संस्कृति से परिचित कराना जरूरी है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा से जोड़ने का उद्देश्य भी यही है कि युवा यह समझ सकें कि उनकी जड़ें और विरासत क्या हैं।उन्होंने कहा कि आधुनिकता अपनाने में कोई बुराई नहीं, लेकिन आधुनिक बनने की दौड़ में परिवार, संस्कार और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूरी नहीं बननी चाहिए। उनके मुताबिक संस्कृत को केवल धार्मिक कर्मकांड से जोड़कर देखना भी सही नहीं है। संस्कृत एक भाषा है, जिसमें भारत की विशाल ज्ञान परंपरा और अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथों की रचना हुई है।प्रो. पांडे ने कहा कि संस्कृत को किसी एक धर्म तक सीमित करना उचित नहीं है। जिस तरह हिंदी और अंग्रेजी भाषाएं हैं, उसी तरह प्राचीन भारत में संस्कृत ज्ञान और संवाद की महत्वपूर्ण भाषा रही है।
बाइट – प्रो रमा कांत पांडे,कुलपति उत्तराखंड संस्कृत विश्वविधालय








