ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन आज एक दिव्य आध्यात्मिक संगम का साक्षी बना, जब विश्व जागृति मिशन के संस्थापक पूज्य सुधांशु जी महाराज ने परमार्थ निकेतन पहुंचकर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी को उनके जन्मदिवस की शुभकामनाएं अर्पित कीं। इस अवसर पर संत चेतना, सनातन संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सारगर्भित चर्चा हुई।

हिमालय की गोद में और मां गंगा के पावन तट पर स्थित परमार्थ निकेतन में पूज्य सुधांशु जी महाराज का भव्य स्वागत किया गया। परमार्थ गुरुकुल के आचार्यों और ऋषिकुमारों ने वैदिक मंत्रोच्चार, शंखध्वनि और पुष्पवर्षा के साथ उनका अभिनंदन किया। इस दौरान पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी तथा पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी के साथ उनकी आत्मीय भेंट और विचार-विमर्श हुआ।

संतों ने अपने संदेश में कहा कि आज तकनीक ने दुनिया को जोड़ दिया है, लेकिन हृदयों को जोड़ने का कार्य केवल अध्यात्म ही कर सकता है। उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य अपने भीतर के मौन और आत्मचिंतन से जुड़ जाए तो समाज में संवाद, परिवार में विश्वास और विश्व में शांति स्वतः स्थापित हो सकती है।

इस अवसर पर भारत की आध्यात्मिक विरासत और वैश्विक नेतृत्व की भूमिका पर भी चर्चा हुई। संतों ने कहा कि आने वाला भारत केवल आर्थिक शक्ति से नहीं बल्कि नैतिक मूल्यों, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक चेतना के बल पर विश्व का नेतृत्व करेगा। युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ते हुए आधुनिकता को अपनाना होगा।

पर्यावरण संरक्षण और जल संरक्षण के विषय पर विशेष चर्चा करते हुए पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि प्रकृति केवल संसाधन नहीं बल्कि हमारी साझा धरोहर है। उन्होंने यमुना स्वच्छता अभियान और नदी तटों पर व्यापक पौधारोपण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

पूज्य सुधांशु जी महाराज ने परमार्थ निकेतन में प्रवाहित सेवा, साधना और संस्कार की परंपरा की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आध्यात्मिक केंद्र मानवता को नई दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अपने जीवन, विचारों और कार्यों से संपूर्ण सनातन समाज को प्रेरणा दी है तथा प्रकृति संरक्षण के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य किया है।

“मैं पूरे सनातन समाज की ओर से पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने आया हूँ। आपने हमें दिशा दी है, आदर्श दिए हैं, संदेश दिए हैं और अपने जीवन से हमें प्रेरित किया है। आप प्रकृति प्रेम और मानव सेवा के अद्भुत प्रतीक हैं।”
इस अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने सुधांशु जी महाराज को हिमालय की दिव्य भेंट स्वरूप रुद्राक्ष का पौधा प्रदान किया। गंगा तट पर आयोजित संध्या आरती वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के बलिदान दिवस को समर्पित रही, जिसमें उनके अदम्य साहस, शौर्य और राष्ट्रभक्ति को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

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